गरीबी को नहीं बनने दिया मजबूरी, बच्चों में देशभक्ति की अलख जगा रहीं माया देवी, राष्ट्रीय गीतों से भर रहीं नई पीढ़ी में संस्कार

पश्चिम चंपारण की माया देवी वर्षों से स्कूल और आंगनवाड़ी में बच्चों को गीतों के माध्यम से दे रही हैं शिक्षा, आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ी समाज सेवा

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि सच्ची लगन और सेवा भावना किसी भी कठिनाई से बड़ी होती है। जिले के नरसियर क्षेत्र की रहने वाली माया देवी, पत्नी राजकुमार महतो, कई वर्षों से बच्चों के बीच राष्ट्रीय भावना, संस्कार और शिक्षा का संदेश गीतों के माध्यम से पहुंचा रही हैं।

माया देवी आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से संबंध रखती हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया। वर्षों से वे स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को राष्ट्रीय गीत, प्रेरणादायक गीत और सामाजिक संदेश देने वाले गीत गाकर सुनाती हैं। इतना ही नहीं, वे बच्चों को इन गीतों का अभ्यास भी कराती हैं, ताकि उनमें देशप्रेम, अनुशासन और अच्छे संस्कार विकसित हो सकें।

स्थानीय लोगों के अनुसार, माया देवी की आवाज में ऐसी सादगी और अपनापन है कि बच्चे पूरे उत्साह के साथ उनके साथ गीत गाते हैं। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर उनकी विशेष भूमिका रहती है। वे अपने गीतों के माध्यम से बच्चों को देशभक्ति, शिक्षा, स्वच्छता, सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाने का प्रयास करती हैं।

बताया जाता है कि आर्थिक अभाव के बावजूद माया देवी ने समाज सेवा का यह कार्य कभी नहीं छोड़ा। उनका मानना है कि यदि बच्चों को बचपन से अच्छे संस्कार और देशभक्ति की शिक्षा दी जाए तो वे भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। यही सोच उन्हें लगातार इस कार्य के लिए प्रेरित करती है।

ग्रामीणों का कहना है कि माया देवी जैसी प्रतिभाओं को उचित मंच और सम्मान मिलना चाहिए। यदि प्रशासन और समाज ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करे तो उनकी कला और सेवा का लाभ अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच सकता है। उनका जीवन संघर्ष, सेवा और समर्पण का ऐसा उदाहरण है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

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