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जीवन सूक्त : रिश्ते सहेजने के लिए होते हैं – संदीप अखिल

A friend in need is a friend indeed… कुछ ख़ास रिश्ते जीवन की अनमोल पूंजी होते हैं । कुछ नाते रक्त सम्बन्ध और परिचय से ऊपर उठकर भावनाओं, विश्वास और समझ से बनते हैं। हर रिश्ता अपनी प्रगाढ़ता के आधार पर आपसे समय और साथ चाहता है। आज की तेज रफ़्तार दुनियां में ऐसा सामंजस्य बना पाना लगभग मुश्किल होता है। मगर सच तो यह है कि क़ीमती रिश्ते सहेजने के लिए होते हैं औपचारिकता निभाने के लिए नहीं।

सम्मान और संवाद की नींव पर टिकी होती है हर रिश्ते की हवेली। रिश्तों को मज़बूत बनाए रखने के लिए एक-दूसरे की भावनाओं को समझना होता है, हैं, मतभेद और विचारधारा की भिन्नता को नजरअंदाज करना होता है, समय-समय पर अपनापन जताना होता है। मतभेद और मानसिक द्वंद्व से ख़ाली कोई रिश्ता नही होता बस इसे अहंकार रहित होकर समझदारी और धैर्य से सुलझाना चाहिए। स्मरण रहे क्षमा और सहनशीलता रिश्तों को दीर्घकालिक बनाती हैं। मशहूर शायर ख़ातिर ग़ज़नवी की एक खूबसूरत ग़ज़ल का एक मतला भी इसी मिज़ाज का है… ”गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए, लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए।”

आज के डिजिटल युग में हम भले ही हजारों लोगों से जुड़े हों लेकिन Globalization के इस दौर में भी अपने व्यवहार से अपने करीबी लोगों को अपने क़रीब ही रखें। उनके साथ समय बिताएँ, उनकी बात सुनें और अपने मन की बात उनसे साझा करें। सम्बन्धों में निवेश किया गया प्रेम और समय जीवन को संतुलित और सुखमय बनाता है। आप इस बात को समझें कि रिश्ते बोझ नहीं बल्कि जीवन की शक्ति हैं। उन्हें सहेजना, संवारना और दिल से निभाना ही उम्र भर की कमाई दौलत है।

संदीप अखिल

सलाहकार संपादक

न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम

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