“मुगल दंभ चकनाचूर: जब हनुमान सेना के आगे नतमस्तक हुआ शहंशाह”
भारतीय वाङ्मय के इतिहास में गोस्वामी तुलसीदास एक ऐसे कालजयी व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से न केवल भक्ति मार्ग को सुगम बनाया, बल्कि मध्यकालीन भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक विखंडन के समय एक सशक्त समन्वयकारी शक्ति के रूप में उभरे। सोलहवीं शताब्दी का भारत जहाँ एक ओर राजनीतिक […]