गुरु-भक्ति की अनुपम मिसाल
महर्षि अगस्त्य के शिष्य सुतीक्ष्ण गुरु-आश्रम में रहकर विद्याध्ययन कर रहे थे। शिक्षा पूर्ण होने पर एक दिन गुरुदेव ने स्नेहपूर्वक कहा—“बेटा! तुम्हारा अध्ययन समाप्त हुआ, अब तुम विदा हो सकते हो।” सुतीक्ष्ण ने विनम्र भाव से उत्तर दिया—“गुरुदेव! विद्या के बाद गुरुदक्षिणा देना शिष्य का धर्म है, कृपया कोई आज्ञा दें।” गुरुदेव बोले—“बेटा! तुमने […]