हार नहीं मानूँगा — अटल बिहारी वाजपेयी
हार नहीं मानूँगारार नहीं ठानूँगा। काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूँ,गीत नया गाता हूँ। क्षणभर ठहरकर, फिर क्यों सोचूँ?तूफ़ानों से आँख मिलाकरपाँव डगमगाए बिनाजीवन-पथ पर चलता जाऊँगा। हार नहीं मानूँगारार नहीं ठानूँगा। अंधकार जितना गहराएगाप्रकाश उतना ही उभरेगा,सूरज परछाई से लड़ता नहींछाया उससे डरकर बिखरती है। किंतु कभी-कभीपरिस्थितियों के पंख टूट जाते हैं,तब भीमन का […]