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Bankipur Election Result: बीजेपी के ‘गढ़’ में प्रशांत किशोर की बड़ी सेंध, PK की बढ़त के ये हैं 5 बड़े कारण

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में कई राउंड की मतगणना के बाद जन सुराज पार्टी (JSP) के संस्थापक प्रशांत किशोर, बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा पर एक बड़ी और निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं. अपने पहले ही चुनाव में उनके इस शानदार प्रदर्शन के पीछे 5 मुख्य कारण रहे:

1. पीके फैक्टर (PK Factor)

पहला सबसे बड़ा कारण खुद चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी नई-नवेली जन सुराज पार्टी 238 सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी. उससे सबक लेते हुए इस बार प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर सीट से किसी दूसरे नेता को उतारने के बजाय खुद मैदान में उतरने का फैसला किया.

प्रशांत किशोर की मजबूत उम्मीदवारी के सामने बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा टिक नहीं सके. बीजेपी ने यह सीट अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के खाली करने के बाद नीरज सिन्हा को मैदान में उतारा था. नितिन नवीन 2006 से 2026 तक लगातार पांच बार बांकीपुर से विधायक रह चुके हैं.

2. बदलाव का मूड (Mood for Change)

दूसरी बात जो प्रशांत किशोर के पक्ष में गई, वह है बीजेपी के इस पारंपरिक गढ़ में जनता के बीच देखा गया बदलाव का मूड. बांकीपुर के कई मतदाता जन सुराज प्रमुख को एक “बेहतर और साफ नीयत वाले उम्मीदवार” के रूप में देख रहे थे.

किशोर ने इस चुनाव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर एक जनमत संग्रह बताया. उन्होंने बांकीपुर को अपना “गढ़” बताने पर बीजेपी के “अहंकार” पर हमला बोलते हुए कहा कि “गढ़ जनता बनाती है, कोई राजनीतिक दल नहीं.”

3. बीजेपी और RJD के वोटबैंक में सेंध

प्रशांत किशोर की इस बड़ी बढ़त के पीछे बीजेपी और मुख्य विपक्षी दल आरजेडी, दोनों के वोटबैंक में लगी भारी सेंध भी एक बड़ा कारण है. बीजेपी के पक्ष में मुख्य रूप से कायस्थ समुदाय का ही गोलबंदी देखने को मिली, जबकि अन्य उच्च जातियों और ओबीसी वर्ग का बड़ा हिस्सा किशोर की तरफ चला गया.

वहीं आरजेडी के पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) वोटबैंक का भी एक बड़ा हिस्सा किशोर की ओर शिफ्ट होता दिखा. मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग ने आरजेडी को छोड़कर किशोर का हाथ इसलिए थामा क्योंकि उन्हें बीजेपी को हराने के लिए उनमें ज्यादा संभावनाएं दिखीं.

4. मुद्दा-आधारित चुनाव प्रचार

अपने चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर जाति और धर्म के पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार और नागरिक सुविधाओं जैसे बुनियादी मुद्दों पर ही टिके रहे. दूसरी तरफ, बीजेपी की ओर से नितिन नवीन बांकीपुर के विकास का कोई नया रोडमैप रखने के बजाय सिर्फ भावनात्मक जुड़ाव के भरोसे ही वोट मांगते नजर आए.

5. जन सुराज की रणनीति

प्रशांत किशोर ने अपने विरोधियों के मुकाबले काफी बेहतर रणनीति के तहत काम किया. उन्होंने बड़ी रैलियों के बजाय मोहल्ला बैठकों और पैदल घूमकर लोगों से सीधे संवाद करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया. इस तरह वह बीजेपी के पारंपरिक “सोशल कॉम्बिनेशन” को तोड़ने में सफल रहे और साथ ही सत्ताधारी पार्टी की स्थानीय इकाई में चल रही अंदरूनी गुटबाजी का भी पूरा फायदा उठाया.

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