|

भारतीय यूज्ड कार बाजार में बड़ा उछाल : 70 लाख गाड़ियों की बिक्री का अनुमान, पहली बार कार खरीदने वाले बने बड़ी ताकत

​Automobile desk – देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। नई गाड़ियों के साथ-साथ अब पुरानी (सेकेंड हैंड) गाड़ियों के प्रति भारतीय ग्राहकों का रुझान काफी तेजी से बढ़ा है। वाहनों की लगातार बढ़ती कीमतों और सीमित बजट के चलते बड़ी संख्या में लोग यूज्ड कार मार्केट का रुख कर रहे हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान भारत का सेकेंड हैंड कार बाजार 7 से 9 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर्ज कर सकता है। इस अवधि में करीब 70 लाख से अधिक पुरानी गाड़ियों के बिकने की संभावना जताई गई है।

​पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत

यूज्ड कार बाजार को सबसे ज्यादा मजबूती उन ग्राहकों से मिल रही है जो जीवन में पहली बार चार पहिया वाहन खरीद रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कुल बिक्री में लगभग दो-तिहाई यानी करीब 66 प्रतिशत योगदान पहली बार कार खरीदने वाले लोगों का है। नई कारों के दाम में लगातार हो रही बढ़ोतरी की वजह से कम बजट वाले खरीदार पुरानी कार को एक व्यावहारिक और किफायती विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

​डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और आसान फाइनेंस ने बदला ग्राहकों का नजरिया

पहले पुरानी गाड़ी खरीदने को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं होती थीं, लेकिन डिजिटल दौर ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। आज विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ग्राहक घर बैठे ही वाहन की स्थिति, उसकी सर्विस हिस्ट्री, इंस्पेक्शन रिपोर्ट और सही कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, संगठित क्षेत्र की कंपनियों द्वारा आसान लोन सुविधाएं और वारंटी देने से ग्राहकों का भरोसा इस बाजार पर और अधिक गहरा हुआ है।

​संगठित बाजार के पास वृद्धि के बड़े अवसर

क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल सेकेंड हैंड कार मार्केट में संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 26 प्रतिशत हो गई है, जो वित्तीय वर्ष 2021-22 में महज 20 से 21 प्रतिशत के आसपास थी। हालांकि, अभी भी इस क्षेत्र का लगभग 74 प्रतिशत कारोबार असंगठित विक्रेताओं या लोकल डीलरों के माध्यम से होता है। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में ब्रांडेड और संगठित कंपनियों के पास इस सेगमेंट में विस्तार करने के काफी बड़े अवसर मौजूद हैं।

​बजट में बड़ी राहत: 20 से 25 फीसदी तक की बचत

हालांकि हालिया जीएसटी (GST) संशोधनों के बाद नई और पुरानी गाड़ियों की कीमतों का अंतर 4 से 6 प्रतिशत तक कम हुआ है, फिर भी सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदना जेब पर काफी हल्का पड़ता है। अगर आप पुरानी हैचबैक या सेडान कार चुनते हैं, तो नई कार की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत तक की बचत होती है। वहीं, एसयूवी (SUV) और यूटिलिटी वाहनों पर भी ग्राहकों को करीब 20 प्रतिशत तक का सीधा वित्तीय फायदा मिल जाता है।

​कम चली और नई हालत वाली गाड़ियों की उपलब्धता

यूज्ड कार बाजार में एक और महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव वाहनों की औसत उम्र को लेकर आया है। पहले जहां बाजार में 8 से 10 साल पुरानी गाड़ियां ज्यादा मिलती थीं, वहीं अब बिकने वाली पुरानी कारों की औसत उम्र घटकर मात्र 4 साल रह गई है। लोग अब पहले की तुलना में जल्दी अपनी गाड़ियां अपग्रेड कर रहे हैं और ऑटो कंपनियां भी तेजी से नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं। इसके चलते खरीदारों को कम चली हुई और बेहतरीन कंडीशन वाली गाड़ियां आसानी से मिल रही हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *