19 वर्षीय बेटी के लापता होने से परिवार में कोहराम, पहले से शादीशुदा युवक पर बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप, कार्रवाई न होने से मां ने लगाई न्याय की गुहार

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के समयपुर बादली थाना क्षेत्र से 19 वर्षीय युवती के लापता होने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। युवती की मां बबिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी नीलू को पहले से शादीशुदा युवक राहुल बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। पीड़ित परिवार का दावा है कि घटना के कई महीने बीत जाने के बावजूद न तो बेटी का कोई सुराग मिला है और न ही आरोपित के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हुई है। इससे परिवार गहरे सदमे और भय के माहौल में जीने को मजबूर है।

पीड़िता की मां बबिता, जो समयपुर बादली स्थित चंदन पार्क में किराये के मकान में रहती हैं, ने बताया कि उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है और परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। उनका कहना है कि 16 अप्रैल 2026 की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच उनकी 19 वर्षीय बेटी नीलू अचानक घर से लापता हो गई। परिवार ने पहले अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में काफी तलाश की, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो 17 अप्रैल 2026 को समयपुर बादली थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस संबंध में जीडी नंबर 0140ए दर्ज किया गया।

बबिता का आरोप है कि उनकी बेटी को राहुल पुत्र जितेंद्र, निवासी राणा पार्क, सिरसपुर, अपने साथ बहला-फुसलाकर ले गया। उनका दावा है कि राहुल पहले से ही फिजा उर्फ निशा नामक महिला से आर्य समाज मंदिर में विवाह कर चुका है और उसका एक बेटा भी है। इसके बावजूद उसने उनकी बेटी को अपने प्रेमजाल में फंसाकर घर से ले जाने की साजिश रची।

पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना वाले दिन जब बबिता घर लौटीं तो नीलू घर पर नहीं थी। खोजबीन के दौरान जब उन्होंने अलमारी देखी तो उसमें रखे लगभग 50 हजार रुपये नकद, सोने की अंगूठी और करीब 20 तोले की चांदी की पायल भी गायब मिली। इसके बाद उन्हें राहुल पर शक हुआ और वे उसके घर पहुंचीं। वहां राहुल के परिजनों से पूछताछ की गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

बबिता का आरोप है कि बाद में जब उन्होंने राहुल की पत्नी फिजा उर्फ निशा से बातचीत की तो उसने स्वयं को राहुल की पत्नी बताते हुए आर्य समाज विवाह से संबंधित दस्तावेज भी दिखाए। इससे परिवार का संदेह और गहरा हो गया कि राहुल पहले से विवाहित होने के बावजूद उनकी बेटी को अपने साथ ले गया।

पीड़िता की मां का कहना है कि उन्होंने कई बार समयपुर बादली थाने जाकर मामले की जानकारी लेने और कार्रवाई की मांग की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने उन्हें कार्रवाई कराने के बजाय डांटकर वापस भेज दिया और कहा कि यदि वह अपनी बेटी के खिलाफ कार्रवाई करवाएंगी तो उन्हें ही परेशानी उठानी पड़ेगी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से लेकर अन्य सक्षम अधिकारियों तक कई शिकायतें और प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन आज तक न तो बेटी का कोई पता चल सका और न ही मामले में ठोस कार्रवाई होती दिखाई दे रही है। परिवार का कहना है कि लगातार बीतते समय के साथ उनकी चिंता और बढ़ती जा रही है तथा पूरा परिवार मानसिक तनाव में जीवन बिताने को मजबूर है।

मामले में पीड़ित परिवार ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर युवती का सुरक्षित पता लगाने, आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि युवक पहले से विवाहित है तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में पुलिस या आरोपित पक्ष का विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

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