राजभवन नहीं, अब बोलिए ‘जन भवन’! राज्यपाल की पहल से एक ही दिन में तैयार हुआ 2,796 पौधों वाला ‘मियावाकी फॉरेस्ट’
सतीश सिंह, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से रविवार को जन भवन परिसर स्थित गुलमोहर कॉलोनी में मियावाकी विधि से वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे के नेतृत्व में एक ही दिन में 2,796 पौधों का रोपण किया गया। इस अभियान में जन भवन के अधिकारियों, कर्मचारियों, कार्मिकों के साथ-साथ गुलमोहर कॉलोनी के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
चार श्रेणियों के पौधे लगाए गए
मियावाकी पद्धति के तहत विभिन्न श्रेणियों के पौधे लगाए गए, जिनमें 699 पेड़, 699 उप-पेड़, 699 झाड़ियां और 699 औषधीय पौधे शामिल हैं। पेड़ों में आम, अर्जुन, नीम, महुआ, जामुन, पारस पीपल, महोगनी और पाकड़ लगाए गए।

वहीं उप-पेड़ श्रेणी में शीशम, आंवला, सहजन, अमलतास और अमरूद जैसी प्रजातियां शामिल रहीं। झाड़ियों में नींबू, करौंदा, हरसिंगार, मेहंदी और गुड़हल लगाए गए, जबकि औषधीय पौधों में एलोवेरा, शतावरी, पिपली, तुलसी, लेमनग्रास और ब्राह्मी का रोपण किया गया।
देखभाल और सिंचाई की अपील
इस अवसर पर डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने कहा कि यह अभियान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मियावाकी तकनीक से तैयार होने वाले सघन वन न केवल हरित आवरण बढ़ाते हैं, बल्कि जैव विविधता को भी समृद्ध करते हैं।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से पौधों को अपना मानकर उनकी नियमित देखभाल करने और पर्याप्त सिंचाई सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधे बड़े होकर घने वन का रूप लें। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह पौधों की सुरक्षा और संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए।
अब तक 12 हजार पौधे रोपे गए
गौरतलब है कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से इससे पहले भी जन भवन परिसर में तीन चरणों में करीब 12 हजार पौधों का मियावाकी विधि से रोपण किया जा चुका है।
अब चौथे चरण के तहत 2,796 नए पौधे लगाए जाने के बाद जन भवन परिसर एक विकसित होते शहरी वन (Urban Forest) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ वातावरण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश राजभवन की सतत पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।