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‘चार दिन की विधानसभा क्या सिर्फ औपचारिकता?’ मायावती ने मानसून सत्र पर उठाए बड़े सवाल

सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा के चार दिवसीय मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने इसकी अवधि और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि जनता की नजरें इस बात पर हैं कि यह सत्र जनहित और जनकल्याण के मुद्दों पर सार्थक बहस का मंच बनेगा या फिर केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा.

सोमवार को विधानसभा सत्र शुरू होने से पूर्व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए पांच सिलसिलेवार पोस्ट में मायावती ने कहा कि 3 अगस्त से शुरू हुए इस सत्र में 4 अगस्त को सरकार अनुपूरक बजट पेश करेगी. लेकिन महज चार कार्य दिवस वाले इस सत्र से जनता की उम्मीद है कि यह संसद के मौजूदा सत्र की तरह हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और संकीर्ण दलगत राजनीति की भेंट नहीं चढ़ेगा.

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मायावती ने कहा कि लोकतंत्र में विधायिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार और अफसरशाही को संविधान के प्रति जवाबदेह बनाए रखना है. यदि विधानसभा के सत्र लगातार छोटे होते जाएंगे तो यह चिंता का विषय है कि जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा कैसे हो सकेगी. उन्होंने सवाल किया कि क्या इतना छोटा सत्र अपने संवैधानिक उद्देश्य पूरे कर पाएगा या फिर यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगा.

बसपा प्रमुख ने सरकार और विपक्ष दोनों को नसीहत देते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की रक्षा और अफसरशाही पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को गंभीर संसदीय आचरण अपनाना होगा. तभी विधानसभा जनता की उम्मीदों पर खरी उतर सकेगी.

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