नौकरशाही पर अत्यधिक निर्भरता से पिछड़ रहा ओडिशा, विकास मॉडल और नेतृत्व पर उठे गंभीर सवाल

भुवनेश्वर। ओडिशा अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा के बावजूद लंबे समय से क्षेत्रीय विषमताओं और ढांचागत बाधाओं से जूझ रहा है। मूल्य संवर्धन के बजाय केवल कच्चे माल के निर्यात पर निर्भरता, धीमी शहरीकरण प्रक्रिया और बुनियादी ढांचे की कमी ने राज्य की विकास क्षमता को सीमित कर दिया है।

इसके साथ ही, तीव्र औद्योगीकरण और आदिवासी अधिकारों व पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी सामाजिक-राजनीतिक चुनौती बना हुआ है। हालांकि, इन सब समस्याओं के मूल में राज्य के राजनीतिक नेतृत्व की नौकरशाही पर अति-निर्भरता को मुख्य कारण माना जा रहा है।

ड्रोन कंपनी का मामला बना चर्चा का केंद्र

नौकरशाही की उदासीनता और प्रशासनिक ढिलाई को एक ड्रोन निर्माता कंपनी के उदाहरण से समझा जा सकता है। भुवनेश्वर में स्थित एक निजी ड्रोन निर्माता कंपनी, जिसके उत्पादों की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान काफी मांग थी, राज्य सरकार से आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता पाने के लिए भटकती रही। जब ओडिशा प्रशासन से कोई सहयोग नहीं मिला, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उद्यम को केवल दो दिनों में सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान कर दीं। परिणामस्वरूप, वह कंपनी ओडिशा छोड़कर उत्तर प्रदेश स्थानांतरित हो गई। यह घटना दर्शाती है कि कैसे प्रशासनिक लालफीताशाही राज्य से निवेश और प्रतिभा को बाहर धकेल रही है।

नवीन पटनायक के दौर से चलती आ रही नौकरशाही के नियंत्रण की विरासत

विकास परियोजनाओं पर नौकरशाही के नियंत्रण की यह विरासत नवीन पटनायक के दौर से चली आ रही है। अपने शुरुआती वर्षों में नवीन पटनायक पूर्व नौकरशाह प्यारे मोहन महापात्र पर पूरी तरह निर्भर थे। जमीनी राजनीतिक नेतृत्व को दरकिनार कर नौकरशाहों पर भरोसा करने की यह कार्यशैली महापात्र की ही देन थी।

आलोचकों का मानना है कि वर्तमान में भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में भी प्रशासन में नौकरशाही का दबदबा बरकरार है, जिससे स्थानीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री के लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना कठिन साबित हो रहा है।

पूर्वी भारत के अन्य राज्य अपने मजबूत और गतिशील नेतृत्व के बल पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में ओडिशा के पिछड़ने का खतरा मंडरा रहा है। अब यह भाजपा नेतृत्व पर निर्भर करता है कि वह ओडिशा के लिए एक स्पष्ट और नई दिशा तय करे या फिर राज्य को इसी तरह नौकरशाही के भरोसे बहने दे।

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