स्क्रीन पर खत्म हुआ सात जन्मों का बंधन: सात समुंदर पार बैठे दंपती का हुआ ऑनलाइन तलाक
सूरत। बदलती तकनीक के इस दौर में अब अदालत से न्याय पाने के लिए भौतिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं रह गया है। सूरत की फैमिली कोर्ट ने एक मिसाल कायम करते हुए विदेशों में रह रहे एक दंपती को भारत आए बिना ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तलाक की मंजूरी दे दी।
पावर ऑफ अटॉर्नी से दायर की थी अर्जी
सूरत के महिधरपुरा निवासी राहुल और उत्राण निवासी सीमा (बदले हुए नाम) का विवाह वर्ष 2015 में हुआ था। शुरुआत में सब ठीक रहा, लेकिन बाद में वैचारिक मतभेद बढ़ने के कारण मार्च 2023 से दोनों अलग रहने लगे। इसके बाद रोजगार के सिलसिले में पति पश्चिम अफ्रीका के देश सिएरा लियोन और पत्नी कनाडा चली गईं।
जब दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया, तो उन्होंने अपने-अपने पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए सूरत फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की।
डिजिटल सुनवाई और गुजरात हाईकोर्ट की टिप्पणी
मामला जब गवाही के चरण में पहुंचा, तो दोनों को भारत बुलाना या दूतावास के जरिए गवाही दर्ज कराना समय और खर्च के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण था। इस पर पति के अधिवक्ता देवांग कसारा और पत्नी के अधिवक्ता अश्विन जोगडिया ने अदालत से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई का अनुरोध किया।
वकीलों ने गुजरात हाईकोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने कहा था—“तकनीक न्याय की दासी होनी चाहिए, रास्ते का पत्थर नहीं।”
बिना भारत आए दर्ज हुई गवाही
फैमिली कोर्ट ने अधिवक्ताओं की दलीलों को स्वीकार करते हुए दोनों को ऑनलाइन गवाही देने की अनुमति दी। इसके बाद कनाडा और सिएरा लियोन में बैठे पति-पत्नी ने वीडियो कॉल के जरिए अपनी आधिकारिक गवाही दर्ज कराई, जिसके आधार पर अदालत ने तलाक का दावा मंजूर कर लिया।
यह फैसला उन प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए बड़ी राहत है, जिनके लिए कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भारत आना आर्थिक और व्यावहारिक रूप से कठिन होता है।
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