UP कैबिनेट का बड़ा फैसला: अब मदरसों में नहीं मिलेगी कामिल-फाजिल की डिग्री, योगी सरकार ने बदला नियम

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में संशोधन को मंजूरी दे दी गई. अब प्रदेश के मदरसों में कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों की डिग्री नहीं दी जाएगी.

कामिल और फाजिल को पहले क्रमश: स्नातक (Graduation) और परास्नातक (Post Graduation) के समकक्ष माना जाता था. मदरसा बोर्ड के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की डिग्रियां प्रदान की जाती थीं.

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हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लिया गया फैसला

मदरसा शिक्षा को लेकर पहले भी न्यायिक प्रक्रिया चली थी. वर्ष 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. हालांकि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा बोर्ड की संवैधानिकता को बरकरार रखा, लेकिन यह स्पष्ट किया कि मदरसा बोर्ड उच्च शिक्षा की डिग्री प्रदान नहीं कर सकता.

अदालत के निर्देशों के बाद सरकार ने अब कानून में संशोधन करने का फैसला लिया है. अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश अंसारी ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद नए सत्र से कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों में प्रवेश बंद कर दिया गया था.

पुराने छात्रों की डिग्री पर नहीं पड़ेगा असर

सरकार ने साफ किया है कि जिन छात्रों ने कोर्ट के आदेश से पहले इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था, उनकी डिग्री की मान्यता प्रभावित नहीं होगी. यानी पुराने विद्यार्थियों को राहत दी गई है, जबकि नए सत्र से कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों को मदरसा बोर्ड की व्यवस्था से हटाया जाएगा.

लखनऊ और नोएडा में बनेगा डीप टेक हब

कैबिनेट बैठक में सिर्फ मदरसा शिक्षा ही नहीं, बल्कि तकनीक और विकास से जुड़े कई अहम फैसले भी लिए गए. सरकार ने लखनऊ और नोएडा में डीप टेक हब (U-Hub) बनाने को मंजूरी दी है.

लखनऊ में बनने वाला हब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थकेयर, इंडस्ट्रियल AI, कृषि जैव प्रौद्योगिकी और डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित होगा. पहले चरण में 25 हजार वर्ग फुट में को-वर्किंग स्पेस और प्रोटोटाइपिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

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जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा नया एक्सप्रेस-वे

कैबिनेट ने जेवर लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण को भी मंजूरी दे दी है. करीब 74.467 किलोमीटर लंबे इस छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर लगभग 8,585 करोड़ रुपये खर्च होंगे. यह एक्सप्रेस-वे जेवर एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा. भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तार दिया जा सकेगा. इससे गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.

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