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सुप्रीम कोर्ट का आदेश- बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता; कहा- हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार

Parents Can Evict Children From Property: सीनियर सिटीजन्स (बुजुर्गों) की गरिमा और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने बड़ा आदेश दिया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कि सीनियर सिटीजन्स (Senior Citizens) अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए। बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि कानून का मकसद बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा तय करना है। सभ्य समाज का स्तर अक्सर इस बात से तय होता है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान और सुरक्षा देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को रद्द किया गया था। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों की गरिमा के लिए ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से निकालने का आदेश देने का अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में दखल देकर गलती की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 7 के तहत ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं और धारा 8 उन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां देती है। वहीं, धारा 27 सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाती है। इसलिए ट्रिब्यूनल को कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी है।

क्या है पूरा मामला

पूरा मामला यूपी की राजधानी लखनऊ का है। लखनऊ निवासी रवि कांत गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से निकालने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था। यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी। मामला तब सामने आया, जब गुप्ता की 81 साल की मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। SDM ने 15 नवंबर 2022 को बेटे की बेदखली का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने भी 9 अगस्त 2023 को इसे बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।

इसके बाद बेटे और बहू ने आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए कहा कि 2007 का कानून बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद आदेश रद्द कर दिए। इसके बाद रवि कांत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने अब फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बदल दिया है। साथ ही कहा कि बुजुर्ग माता-पिता च्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं।

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