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मारकेश ग्रह की दशा में जीवन पर पड़ने वाला प्रभाव और बचाव के उपाय

ज्योतिष शास्त्र में ‘मारकेश’ शब्द का उल्लेख आते ही स्वाभाविक रूप से मन में भय का भाव पैदा होता है, लेकिन इसका अर्थ केवल मृत्यु से नहीं है। जन्मकुंडली में मारक ग्रह की दशा या अंतर्दशा कई बार व्यक्ति को मरणतुल्य कष्ट, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और जीवन में बड़े उतार-चढ़ाव का अनुभव करा सकती है। हालांकि किसी भी कुंडली में फलादेश केवल एक ग्रह के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि पूरी कुंडली की स्थिति का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक होता है।

मारकेश की दशा को केवल भय और मृत्यु से जोड़कर देखना उचित नहीं है। यह जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों, स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देने वाला ज्योतिषीय काल भी हो सकता है। संपूर्ण जन्मकुंडली का अध्ययन, उचित सावधानी, सकारात्मक आचरण और आध्यात्मिक साधना इस अवधि को बेहतर ढंग से संभालने में सहायक हो सकती है।

क्या होता है मारकेश ग्रह?

जन्मकुंडली में जिस ग्रह को जातक के लिए मारक होने का अधिकार प्राप्त होता है, उसे सामान्यतः मारकेश कहा जाता है। अलग-अलग लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के लिए मारक ग्रह अलग हो सकते हैं। विशेष रूप से द्वितीय और सप्तम भाव तथा उनके स्वामियों को मारकत्व के विचार में प्रमुख माना जाता है। इसके साथ ही अष्टम, द्वादश और अन्य संबंधित भावों तथा उनके स्वामियों की स्थिति भी देखना आवश्यक होता है।

सप्तम भाव से आठवां भाव द्वितीय भाव होता है, इसलिए द्वितीय भाव को धन-कुटुंब के साथ-साथ मारक भाव के रूप में भी देखा जाता है। यही कारण है कि मारकेश का निर्धारण करते समय केवल एक ग्रह देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता।

मारकेश की दशा में क्या-क्या परेशानियां आ सकती हैं?

मारकेश ग्रह की दशा या अंतर्दशा में व्यक्ति को परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न प्रकार के संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, मानसिक तनाव, दुर्घटना का भय, अचानक बीमारी, आर्थिक नुकसान, व्यापार में बाधा, मित्रों या संबंधियों से विवाद अथवा विश्वासघात और सामाजिक प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

कई बार यही समय व्यक्ति के जीवन में ऐसे अनुभव लेकर आता है, जो लंबे समय तक उसकी स्मृति में बने रहते हैं। हालांकि यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मारकेश की दशा का अर्थ अनिवार्य रूप से मृत्यु या किसी निश्चित अनिष्ट घटना से नहीं होता। फलादेश ग्रह की शक्ति, उसकी स्थिति, दृष्टि, युति, शुभ-अशुभ प्रभाव, दशा-अंतर्दशा और संपूर्ण जन्मकुंडली के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

सूर्य और चंद्रमा के मामले में क्या है विशेष?

ज्योतिष परंपरा में सूर्य को जगत की आत्मा और चंद्रमा को मन एवं अमृत तत्व का प्रतिनिधि माना गया है। इसलिए इनके मारकत्व से संबंधित फलादेश में भी विशेष सावधानी बरती जाती है। सूर्य और चंद्रमा की दशा-अंतर्दशा में उनकी वास्तविक स्थिति, बल और कुंडली पर पड़ने वाले शुभ-अशुभ प्रभाव को देखकर ही परिणाम निर्धारित करना चाहिए।

मारकेश की दशा में क्या करें?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मारकेश की दशा या अंतर्दशा में व्यक्ति को आध्यात्मिक अनुशासन और सात्त्विक आचरण अपनाना चाहिए। सरल उपायों में महामृत्युंजय मंत्र का जाप, भगवान शिव का पूजन, रुद्राभिषेक तथा संबंधित ग्रह के मंत्र का जाप प्रमुख माने जाते हैं।

कुंडली के सप्तम भाव में स्थित राशि के स्वभाव के अनुसार शिव या शक्ति की आराधना का विधान भी कुछ ज्योतिष परंपराओं में बताया गया है। जिस ग्रह को मारक माना गया हो, उसकी शांति के लिए उसके मंत्र का नियमित जाप और संबंधित ग्रह-कवच का पाठ भी किया जा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी कठिन दशा के आने की जानकारी मिलने पर भयभीत होने के बजाय अपने आचरण, दिनचर्या और विचारों में सकारात्मक सुधार करना चाहिए। ज्योतिषीय उपाय श्रद्धा और संयम के साथ किए जाएं तथा स्वास्थ्य या अन्य गंभीर समस्या होने पर आवश्यक चिकित्सकीय एवं व्यावहारिक सलाह की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा | 9415 087711

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