भैंस का मांस लदे लोडिंग ऑटो से कार की भीषण टक्कर, एक ही परिवार के कई लोग घायल, पुलिस पर कार्रवाई न करने और वीडियो डिलीट कराने का आरोप

रामपुर-संभल मार्ग पर गुरुवार तड़के हुए एक भीषण सड़क हादसे में दिल्ली निवासी एक ही परिवार के कई लोग घायल हो गए। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि दुर्घटना एक अनियंत्रित लोडिंग ऑटो की वजह से हुई, जिसमें भैंस का मांस भरा हुआ था। वहीं, हादसे के बाद पुलिस पर उचित कार्रवाई न करने और घटना के वीडियो डिलीट कराने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पीड़ित अरुण के अनुसार, वह सुबह करीब 5 से 6 बजे के बीच अपने परिवार के साथ दिल्ली से संभल जिले में स्थित अपने दादा-दादी से मिलने जा रहे थे। उनकी कार को चालक सूरज सावधानीपूर्वक चला रहा था। कार में उनके पिता रामपाल, माता मंजू देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य भी सवार थे। इसी दौरान बुलंदशहर रोड पर सामने से आ रहे एक लोडिंग ऑटो ने कथित रूप से संतुलन खो दिया और सीधे उनकी कार से टकरा गया।

अरुण का आरोप है कि लोडिंग ऑटो में भैंस का मांस भरा हुआ था और वह ओवरलोड होने के कारण अनियंत्रित हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार सभी लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि सूचना मिलने के कुछ ही देर बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई, क्योंकि घटनास्थल से थाना करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हालांकि उनका आरोप है कि पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ऑटो को खाली करवाने की कार्रवाई तो की, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

अरुण ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हादसे के बाद जब वह अपने मोबाइल से घटना के वीडियो बना रहे थे, तभी मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनका मोबाइल लेकर वीडियो डिलीट करा दिए। उनका कहना है कि चौकी प्रभारी संजीव रावत तथा राहुल नामक पुलिसकर्मी ने उनसे मोबाइल लेकर वीडियो फोटो हटवा दी। इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अरुण का कहना है कि यदि सड़कों पर ओवरलोड और अनियंत्रित वाहनों की नियमित जांच होती तथा यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाता, तो इस तरह की गंभीर दुर्घटना टाली जा सकती थी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा, ओवरलोड वाहनों की आवाजाही और यातायात नियमों के प्रभावी पालन पर गंभीर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि प्रशासन यदि नियमित रूप से जांच अभियान चलाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

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