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पिता की मामूली वेतन पर अभिजीत दीपके ने कैसे की अमेरिका में पढाई ? RTI एक्टिविस्ट ने खड़े किये सवाल, जांच की उठाई मांग

नीट पेपर लीक मामले में मोदी सरकार के मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर करने वाले अभिजीत दीपके नई मुसीबत में फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं. सूरत के RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है. उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके को नौकरी के दौरान केवल 60,000 से 65,000 रुपये मासिक वेतन मिलता था, तो वे अपने बच्चों की अमेरिका में पढ़ाई का खर्च कैसे उठा पाए.

1 करोड़ के फंड पर भी खड़े किये सवाल

अमित तिवारी ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग (ECI), सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) और महाराष्ट्र सरकार के पास शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने CJP के कानूनी दर्जे, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड और भगवानराव दीपके की आर्थिक संपत्तियों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं.

3 अलग-अलग संस्थाओं में शिकायतें दर्ज

अमित तिवारी ने कहा कि उन्होंने 3 अलग-अलग संस्थाओं में शिकायतें दर्ज कराई हैं. उन्होंने बताया कि CJP के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत की गई है. वहीं कपिल सिब्बल द्वारा दिए गए 1 करोड़ रुपये के फंड को लेकर उन्होंने CBIC में शिकायत दर्ज कर यह मांग की है कि इस राशि पर 18 प्रतिशत GST लगाया जाए. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार से भी शिकायत की गई है. उनके अनुसार भगवानराव दीपके महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे. तिवारी का कहना है कि अगर उनकी आय सीमित थी तो उनके परिवार की तरफ से विदेश में पढ़ाई जैसे खर्च कैसे पूरे किए गए, इसकी जांच होनी चाहिए.

महाराष्ट्र सरकार को क्या कहा गया?

अमित तिवारी ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि कहीं यह आय से अधिक संपत्ति का मामला तो नहीं है. अगर जांच में ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. CJP के खिलाफ की गई अपनी शिकायत का जिक्र करते हुए तिवारी ने आरोप लगाया कि यह संगठन बिना पंजीकरण के राजनीतिक दल की तरह काम कर रहा है और लोगों से चंदा भी ले रहा है. उन्होंने कहा कि यदि कोई संगठन राजनीतिक पार्टी की तरह कार्य करता है और फंड प्राप्त करता है, तो उसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में पंजीकृत होना चाहिए. उन्होंने कहा कि CJP पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन उसे 1 करोड़ रुपये का फंड मिला है. इसलिए उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है.

CJP आंदोलन की आलोचना

अमित तिवारी ने CJP के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि शुरुआत में आंदोलन का उद्देश्य NEET पेपर लीक मामले पर छात्रों की आवाज उठाना था, लेकिन बाद में यह अपने मूल मुद्दे से भटक गया. उन्होंने कहा कि जब तक आंदोलन केवल NEET और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर था, तब तक कोई समस्या नहीं थी. लेकिन बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की गईं. तिवारी का आरोप है कि प्रधानमंत्री के विदेशी नेताओं के साथ संबंधों को लेकर भी गलत बातें कही गईं. उन्होंने कहा कि इन सभी मामलों को लेकर भी संबंधित संस्थाओं में शिकायत दर्ज कराई गई है और उनका मानना है कि ऐसी गतिविधियां उचित नहीं हैं. अब उन्होंने मांग की है कि संबंधित एजेंसियां इन शिकायतों की जांच करें और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करें.

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