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दुर्घटना में चेहरे की हड्डियां टूटने से दिख रही थीं 2-2 तस्वीरें, SGPGI ने हाईटेक सर्जरी से रचा इतिहास

सतीश सिंह, लखनऊ। अगर किसी गंभीर सड़क हादसे या दुर्घटना के बाद चेहरे की हड्डियां इस तरह क्षतिग्रस्त हो जाएं कि व्यक्ति को हर चीज दो-दो दिखाई देने लगे, चेहरा टेढ़ा नजर आने लगे और सामान्य जीवन मुश्किल हो जाए, तो ऐसे मामलों का इलाज अब उत्तर प्रदेश में भी संभव हो गया है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के एपेक्स ट्रॉमा सेंटर ने प्रदेश में पहली बार ऐसी अत्याधुनिक सर्जरी कर चिकित्सा जगत में नया इतिहास रच दिया है।

प्रदेश में पहली बार सफलता

एसजीपीजीआई के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग ने इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन, ओ-आर्म इमेजिंग और पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट (PSI) जैसी आधुनिक तकनीकों का एक साथ इस्तेमाल करते हुए एक मरीज की सेकेंडरी ऑर्बिटल वॉल रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में इस तकनीक का यह पहला सफल मामला है।

मरीज पहले एक गंभीर चेहरे की चोट का शिकार हुआ था। हादसे के बाद उसकी आंख के आसपास की हड्डी (ऑर्बिटल वॉल) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे उसे लगातार दो-दो दिखाई देता था, चेहरे का संतुलन बिगड़ गया था और सामान्य कामकाज भी प्रभावित हो गया था। पुरानी चोट के कारण हड्डियां गलत तरीके से जुड़ चुकी थीं, इसलिए यह ऑपरेशन डॉक्टरों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।

3D तकनीक का इस्तेमाल

इस सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने कंप्यूटर आधारित नेविगेशन सिस्टम की मदद से मरीज के सीटी स्कैन और वास्तविक शारीरिक संरचना का रियल-टाइम मिलान किया। इसके बाद मरीज के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया 3D पेशेंट-स्पेसिफिक इम्प्लांट बिल्कुल सही स्थान पर लगाया गया।

इतना ही नहीं, ऑपरेशन पूरा होने से पहले ही ओ-आर्म इमेजिंग के जरिए उसी समय यह सुनिश्चित कर लिया गया कि इम्प्लांट पूरी तरह सही जगह पर फिट है। इससे भविष्य में दोबारा ऑपरेशन की संभावना काफी कम हो गई।

निदेशक ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

एसजीपीजीआई के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सफलता आधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संस्थान लगातार ऐसी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं विकसित कर रहा है, जिससे प्रदेश के मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज अपने ही राज्य में मिल सके।

इस हाईटेक सर्जरी का नेतृत्व डॉ. कुलदीप विश्वकर्मा और डॉ. भरत शुक्ला ने किया। उनके साथ सर्जिकल, एनेस्थीसिया और नर्सिंग टीम के विशेषज्ञों ने मिलकर इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाया।

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