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14 अगस्त को फिर याद आएगा बंटवारे का दर्द! लखनऊ में प्रदर्शनी, मौन जुलूस और 1947 की अनसुनी कहानियां…

लखनऊ. स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले 14 अगस्त को उत्तर प्रदेश में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस-2026’ विशेष रूप से मनाया जाएगा. इस बार सरकार का उद्देश्य केवल औपचारिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि 1947 के भारत विभाजन की त्रासदी, लाखों लोगों के दर्द और विस्थापन की पीड़ा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है.

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राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम लखनऊ में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित होगा, जबकि प्रदेश के सभी 75 जिलों में भी स्मृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इस दौरान विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों और उनके परिवारों की अनकही कहानियां, दुर्लभ दस्तावेज और ऐतिहासिक स्मृतियां लोगों के सामने लाई जाएंगी.

जीपीओ पार्क में लगेगी दुर्लभ प्रदर्शनी

लखनऊ के जीपीओ पार्क में विभाजन पर आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी. इसमें भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के साथ उन परिवारों की निजी वस्तुएं, तस्वीरें और दस्तावेज भी प्रदर्शित किए जाएंगे, जो 1947 के बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आए थे. मुख्यमंत्री और अन्य विशिष्ट अतिथि प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. इसका उद्देश्य लोगों को विभाजन के वास्तविक इतिहास और उसके मानवीय पक्ष से रूबरू कराना है.

मौन जुलूस और दो मिनट का मौन

प्रदर्शनी के बाद जीपीओ पार्क से लोकभवन तक मौन जुलूस निकाला जाएगा. कार्यक्रम में विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा जाएगा. इसके साथ ही मतुआ समुदाय के इतिहास और योगदान पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया जाएगा.

स्कूल-कॉलेजों में होंगे संवाद और व्याख्यान

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, प्रदेश के स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष व्याख्यान, चर्चा और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इनका उद्देश्य युवाओं को विभाजन के इतिहास, उसके दर्द और उससे मिले सामाजिक व राष्ट्रीय सबक से परिचित कराना है. इन आयोजनों में सिंधी, पंजाबी और बंगाली समाज सहित विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी भी रहेगी.

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शरणार्थी परिवार साझा करेंगे अपने अनुभव

कार्यक्रमों में विभाजन से प्रभावित शरणार्थी परिवारों की पहली और दूसरी पीढ़ी भी शामिल होगी. उनके अनुभवों के माध्यम से नई पीढ़ी को उस दौर की कठिनाइयों और संघर्षों की जानकारी दी जाएगी. इसके अलावा कैंडल मार्च, शांति पाठ, मौन जुलूस और 1947 के विभाजन से जुड़ी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, ताकि इतिहास की इस त्रासदी को याद रखते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया जा सके.

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