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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सदन में संग्राम, स्पीकर महाना बोले- ‘मैं दुखी हूं…’, सपा विधायक के निलंबन से बढ़ा सियासी घमासान

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ. समाजवादी पार्टी के विधायकों ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर नारेबाजी करते हुए चर्चा की मांग की. विरोध-प्रदर्शन के दौरान सपा विधायक सचिन यादव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर लेकर सदन में पहुंचे, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उन्हें पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया.

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सदन में बढ़ते हंगामे के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना संबोधन भी पूरा नहीं कर पाए. इस घटना को लेकर अब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नाराजगी जताई है.

स्पीकर महाना ने जताया दुख, संविधान का किया जिक्र

बुधवार को विधानसभा सत्र के तीसरे दिन सदन को संबोधित करते हुए सतीश महाना ने कहा कि मंगलवार की घटना से वह काफी दुखी और निराश हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि शायद प्रयासों में कोई कमी रह गई है. महाना ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि कमी संविधान में नहीं बल्कि उसे चलाने वाले व्यक्तियों में हो सकती है. उन्होंने कहा कि जिस सदस्य को सदन का रोल मॉडल माना जाता था, उसके आचरण से उन्हें पीड़ा हुई है.

‘रसीद दिखाइए, कितना चंदा दिया’, बयान पर मचा सियासी बवाल

मंगलवार को जब सपा विधायक राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर वेल में पहुंच गए थे, तब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा था कि जो विधायक मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने की बात कर रहे हैं, वे पहले अपनी रसीद दिखाएं कि उन्होंने कितना योगदान दिया है. इस बयान के बाद विपक्ष ने विरोध जताया. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि विधानसभा में विधायकों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है.

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अधिकार है. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में आम जनता के साथ-साथ विधानसभा में भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

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वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है और विपक्ष को नियमों के तहत अपनी बात रखनी चाहिए. राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक टकराव अब यूपी की सियासत में नया मुद्दा बन गया है.

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