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NSP पोर्टल पर सेंध लगाकर लाखों की छात्रवृत्ति हड़पने वाला साइबर गिरोह बेनकाब, 2100 बैंक खातों में भेजी गई थी राशि

अजमेर। राजस्थान के अजमेर में नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) के जरिए सरकारी छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। अजमेर जिला पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पश्चिम बंगाल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह ने फर्जी दस्तावेजों और डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल कर छात्रवृत्ति के नाम पर लाखों रुपये की सरकारी राशि हड़प ली।

पुलिस के मुताबिक, यह फर्जीवाड़ा भारत सरकार के अल्पसंख्यक विभाग की ओर से दी जाने वाली छात्रवृत्ति में वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान किया गया। गिरोह ने करीब 30 शिक्षण संस्थानों से जुड़े आवेदनों में गलत और फर्जी जानकारियां दर्ज कर छात्रवृत्ति की राशि अपने कब्जे में लेने की साजिश रची थी।

2 जून 2025 को दर्ज हुआ था मामला

मामले का खुलासा होने के बाद जिला कलेक्टर की ओर से 2 जून 2025 को अजमेर के सिविल लाइंस थाने में प्रकरण दर्ज कराया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया।

SIT ने तकनीकी विश्लेषण और मिले डिजिटल सुरागों के आधार पर पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के बांग्लादेश सीमा से सटे इलाकों में आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने चकलागंज और काजीगच्छ गांवों में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तबरेल अहमद और सानमांझ के रूप में हुई है।

आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। इनमें—

85 मोबाइल सिम कार्ड

2 लैपटॉप

2 प्रिंटर

7 चांस फिंगरप्रिंट

फिंगरप्रिंट मशीन

7 एटीएम कार्ड

मोबाइल फोन

बैंक पासबुक

अन्य डिजिटल उपकरण शामिल हैं।

पुलिस की जांच में आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन से करीब 2100 बैंक खातों की जानकारी भी मिली है। इसके अलावा 1000 से अधिक चांस फिंगरप्रिंट, करीब 2000 लोगों के आधार कार्ड और फोटो तथा लगभग 1500 स्टांप की प्रतियां बरामद हुई हैं। पुलिस इन सभी डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही है।

कोरोना काल में ऑनलाइन सत्यापन का उठाया फायदा

मामले की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कोरोना काल के दौरान ऑनलाइन प्रक्रिया और दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन व्यवस्था का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया।

सीओ नॉर्थ शिवम जोशी के अनुसार, गिरोह ने इंटरनेट के जरिए विभिन्न स्कूलों के DISE कोड और अन्य जरूरी जानकारियां जुटाईं। इसके बाद फर्जी सिम कार्ड के माध्यम से OTP हासिल कर छात्रवृत्ति आवेदनों का सत्यापन कराने की प्रक्रिया में हेरफेर किया गया।

आरोपियों ने पहले से जुटाए गए डिजिटल फिंगरप्रिंट और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर नोडल अधिकारियों के स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया। इसके बाद जैसे ही सरकार की ओर से छात्रवृत्ति की राशि स्वीकृत हुई, उसे कथित तौर पर अलग-अलग फर्जी तरीके से खोले गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।

मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क में गिरफ्तार दोनों आरोपियों के अलावा अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। बरामद बैंक खातों, आधार कार्ड, फिंगरप्रिंट, सिम कार्ड और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच के आधार पर गिरोह के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।

अजमेर पुलिस की विशेष टीम अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और कथित मास्टरमाइंड की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से पूछताछ और बरामद डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े से जुड़े नेटवर्क और सरकारी राशि के लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

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