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नर्मदापुरम में पोषण आहार सप्लाई ठप: अनुबंध खत्म होने से 3 जिलों में मंडराया कुपोषण का खतरा, 5,600 से अधिक बच्चे प्रभावित 

दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। जिले सहित पड़ोसी हरदा और बैतूल में कुपोषण के हालात बेहद चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार के ‘मिशन पोषण 2.0’ के तहत गर्भवती, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और 6 वर्ष तक के बच्चों को वर्ष में कम से कम 300 दिन पोषण आहार देने का प्रावधान है। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण नर्मदापुरम की 1772 आंगनबाड़ियों में जुलाई तक महज 180 दिन ही पोषण आहार बंट सका है।

​अनुबंध खत्म, टेंडर की प्रक्रिया भी अटकी

इस संकट की मुख्य वजह माखन नगर स्थित पोषण आहार संयंत्र का बंद होना है। ‘मां नर्मदा औद्योगिक सहकारी संघ मर्यादित’ का शासन के साथ अनुबंध 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुका है। अनुबंध खत्म हुए महीनों बीत जाने के बाद भी नई व्यवस्था के लिए अब तक टेंडर जारी नहीं किए गए हैं। इसका सीधा असर तीन जिलों की हजारों महिलाओं और मासूम बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है।

​आंकड़े बयां कर रहे गंभीर तस्वीर

नर्मदापुरम जिले में कुपोषित और अति-कुपोषित बच्चों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।
* ​वर्ष 2025-26 में कुपोषित बच्चों की संख्या 5,108 थी।
* ​जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर 5,662 हो गई है।
* ​बढ़ोतरी में इस वर्ष में 554 नए बच्चे कुपोषण की गिरफ्त में आए हैं।
​विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में अधिकांश बच्चे ‘वेस्टिंग’ (सूखा रोग) से प्रभावित हैं, जिसमें शरीर का वजन लंबाई के अनुपात में बेहद कम हो जाता है।

​अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना बेरुखी

जब इस गंभीर विषय पर न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ ने जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) संजय कुमार जैन से बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने पहले डेढ़ घंटे इंतजार कराया और फिर गैर-जिम्मेदाराना जवाब देकर बात टाल दी।​अधिकारियों की इस बेरुखी का खामियाजा उन मासूमों को भुगतना पड़ रहा है, जिनका वजन पोषण आहार न मिलने से लगातार गिर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब नींद से जागता है और कब इन तीन जिलों में पोषण आहार की आपूर्ति बहाल होती है।

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